डॉ. अविनाश कुमार झा की
फेसबुक पोस्ट- "तख्तापलट तो हो चुका है, अब तो सिर्फ कानूनी लड़ाई लड़ी जानी
शेष है। चुनाव के सांध्यकाल मे छिड़े इस समर के विजेता के हाथों मे ही दल का
भविष्य होगा। वैसे सत्ता हस्तांतरण शांतिपूर्ण हो जाये तो बेहतर!" पर
सुमित बर्मन की टिप्पणी-
एक बारात में ज्यादा लोग आगये। भोजन कम था। हलवाई ने हाथ खड़े कर दिए। इज्जत जाने वाली थी।
आइडिया!!
छोरी के बाप और भाई आपस में भीड़ गये। खूब शोर शराबा मचाया। गाली गलौच हुआ। तलवारें निकल गयीं। अधिकतर लोग घबरा गए। सोचा बात बिगड़े
होटल ढाबे बन्द हो जायें उससे पहले निकल लो। बहुत लोग बिना जीमे भाग गये।
दोनों बाप बेटो ने राजीनामा कर लिया बारात को भरपूर जिमाया और बाप बेटे एक हो गये। बेचारे बाराती कुछ नही समझ पाए!!
नोट:- इस सत्य घटना का, मु्लायम और अखिलेश यादव से कोई लेना देना है के नहीं, आप को बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप खुद समझदार हो!!!! -Sumit Barman
और एक अन्य मित्र की फेसबुक पोस्ट जो नए साल पर बधाई से सम्बन्धित थी पर एक मित्र द्वारा दी गई टिप्पणी-
"एक ईंट और गिर गई दीवार-ए-ज़िन्दगी से,
नादान कह रहें हैं नया साल मुबारक हो।।"
इन दोनों पोस्ट को पढ़कर बड़ा आनन्द आया। यह
आनन्द शायद इसलिए भी हो कि मित्रों की सोंच मेरे व्यक्तिगत सोंच से मेल
खाती है। यहाँ प्रस्तुत है उन दोनों मित्रों की फेसबुक टिप्पणियाँ-


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