रविवार, 25 सितंबर 2016

रक्तदानी व पत्रकार विजय शंकर श्रीवास्तव की माता का निधन

काफी समय से जुड़ी रही भवानी सेना से

जौनपुर। अपनी बेबाक लेखनी के साथ-साथ सामाजिक कार्यो में मसलन रक्दान जैसे कार्यो में वह भी बगैर किसी तामझाम और मीडिया की सुर्खियों से दूर होकर निस्वार्थ कईयों को रक्दान के जरिए जीवन देने और खुद इस महादान के लिए कईयों के प्रेरणाश्रोत बने पत्रकार और पूर्व शिवसेना जिला प्रमुख विजय शंकर श्रीवास्तव ‘राजू’ की माता विभा श्रीवास्तव का 68 की अवस्था में 20 सितंबर 2016 दिन मंगलवार की भोर में उनके गृह निवास हुसैनाबाद में निधन हो गया। वह इधर काफी दिनों से अस्वस्थ्य चल रही थी। वह अपने पीछे एक भरापूरा परिवार छोड़ गई है। 
उनका अंतिम दाह संस्कार वाराणसी स्थित गंगा नदी के मणिकर्णिका घाट पर किया गया जिन्हें मुखाग्नि उनके छोटे बेटे विजय शंकर श्रीवास्तव ने दी। जिनके निधन का समाचार सुनते ही उनके आवास पर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लगा रहा।  गौरतलब हो कि स्वर्गीय श्रीमती विभा श्रीवास्तवा जनपद के वरिष्ठ रंगकर्मी, अधिवक्ता, रचनाकार, नाट्यकार तथा फिल्म प्रोड्यूसर स्वर्गीय रमेश चन्द्र श्रीवास्तव की पत्नी रही। जिनके छोटे बेटे विजय शंकर श्रीवास्तव अविवाहित रहने के कड़े फैसले के साथ अपना पूरा जीवन समाजसेवा के प्रति समर्पित कर रक्दान के लिए एक मुहिम चलाए हुए है। यह बहुत कम ही लोगों को पता होगा कि उन्होंने अब तक न केवल दो दर्जन से ज्यादा लोगों को स्वयं के शरीर से रक्तदान किया है, बल्कि कई युवाओें की एक टीम भी बनाई जो गरीब लोगों को जिनकों पैसे के अभाव में रक्त नहीं मिल पाता था या किसी के उपचार में रक्त बाधा बन रहा था ऐसे लोगों को इनकी टीम और यह स्वेछा पूर्वक रक्त देने का काम करते रहे है। 
एक दशक से ज्यादा समय तक शिवसेना के जिला प्रमुख पद का बखूबी निर्वहन करने के साथ यह काफी चर्चाओं में भी रहे है। खासकर किसी जनहित के मुद्दे पर या देश से जुड़ा हुआ मसला रहा हो। पत्रकार कौशलेन्द्र गिरि, रामशरण यादव, सन्तोष देव गिरि, लालप्रकाश ‘‘राही’’ सुशील कुमार मिश्रा, अरूण कन्नौजिया इत्यादि सहित श्रमिक कल्या समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अख्तर अली व कई संगठनों के पदाधिकारियों आदि ने उनके निधन पर शोक संवेदना जताते हुए ईश्वर से उनके परिवार को इस दुःख को सहने की सहन शक्ति प्रदान की प्रार्थना की है। 

 रिर्पोट- सन्तोष गिरि

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