गुरुवार, 12 जनवरी 2017

विधानसभा चुनाव तय करेगा आगे की राजनीति का भविष्य?

पांच राज्यों में चुनावों को लेकर चली रही हचल को चुनाव आयोग ने दूर कर दिया है। ४ जनवरी 2017 को चुनाव आयोग के आयुक्त नसीम जैदी ने यूपी, पंजाब, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के तहत 11 फरवरी से लेकर आठ मार्च तक सात चरणों में मतदान होगा । वहीं, पंजाब और गोवा में एक ही दिन चार फरवरी को मतदान होगा तथा उत्तराखंड में 15 फरवरी को वोट डाले जाएंगे। मणिपुर में दो चरणों में चार और आठ मार्च को मतदान होगा । इन सभी राज्यों के विधानसभा चुनाव की मतगणना 11 मार्च को होगी । पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीख का ऐलान कर दिया चुनाव की सदगर्मी को और तेज कर दिया है। इन पांच राज्यों में सबसे मजेदार यूपी का का विधानसभा चुनाव होगा। 
वहीं, यूपी में सभी चुनावी पार्टीयां जोरों पर चुनाव की तैयारी में लगी हुईं हैं। वैसे तो हम सभी बखूबी जानते हैं कि यूपी की राजनीती गलियारों में क्या चल रहा है। आपको बता दें कि  उत्तर प्रदेश में 11 फरवरी को पहले चरण के मतदान के तहत 15 जिलों में 71 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे । 11 जिलों में 67 सीटों के लिए दूसरे चरण के तहत 15 फरवरी को मतदान होगा । इसी तरह तीसरे चरण में राज्य के 12 जिलों में 19 फरवरी को 69 निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान होगा । चौथे और पांचवें चरण का मतदान 23 और 27 फरवरी को होगा जिसके तहत क्रमश: 53 और 52 विधानसभा सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे । उत्तर प्रदेश में छठे चरण के मतदान के तहत चार मार्च को 49 सीटों पर मतदान होगा । सातवें चरण का मतदान आठ मार्च को होगा जिसमें 40 सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे । पंजाब और गोवा में एक ही दिन चार फरवरी को क्रमश: 117 और 40 सीटों के लिए मतदान होगा । चुनाव प्रक्रिया नामांकन दाखिल किए जाने के साथ 11 जनवरी से शुरू हो जाएगी । वहीं, उत्तराखंड में 70 विधानसभा सीटों के लिए एक ही दिन 15 फरवरी को मतदान होगा, जबकि मणिपुर में मतदान दो चरणों में चार और आठ मार्च को होगा । उत्तराखंड में चुनाव प्रक्रिया 20 जनवरी से शुरू हो जाएगी, वहीं मणिपुर में चुनाव प्रक्रिया अधिसूचना जारी होने के साथ ही 11 फरवरी से शुरू होगी जहां नामांकन शुरू हो जाएंगे ।
पंजाब, गोवा और मणिपुर विधानसभाओं का कार्यकाल 18 मार्च को समाप्त हो रहा है, जबकि उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 26 मार्च को और उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 27 मई को पूरा हो रहा है । इन पांचों राज्यों में कुल 690 निर्वाचन क्षेत्रों में से 133 अनुसूचित जातियों तथा 23 अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित हैं । गौर हो कि गोवा, मणिपुर और पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 18 मार्च को खत्म हो रहा है जबकि उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 26 मार्च तक है। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 27 मार्च को खत्म हो रहा है। गोवा विधानसभा में 40 सीटें हैं। वहीं मणिपुर में 60, पंजाब में 117, उत्तराखंड में 70 सीटें हैं। चुनावी दृष्टि से सबसे अहम राज्य उत्तर प्रदेश है जहां विधानसभा में 403 सीटें हैं। वहीं आप को ज्ञात हो कि भारत देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदश की बागरडोर  समाजवादी पार्टी (सपा) से अखिनेश यादव ने संभाल रखी है  तो उत्तराखंड से मुख्यमंत्री की कुर्सी कांग्रेस के हरीश रावत ने संभाल रखी है। वहीं, मणिपुर से भी मुख्यमंत्री की कुर्सी कांग्रेस की झोली में ही है और पंजाब की बात करें तो वहां की सत्ता की बागडोर को भाजपा और अकालीदल ने समेट रखा है। 
दूसरी ओर गोवा की बागडोर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)ने अपने हाथों में ले रखी है। आपको बता दें कि इस पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भारत की राजनीतिक पार्टीयों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। वहीं सभी पार्टीयों ने होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दीं हैं। राजनीति पार्टीयां चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंक रही हैं। वहीं देखने वाली बात यह है कि कौन कौन लायगा अपनी पांच राज्यों में सरकार? इन सबसे अलग हटकर एक बात यह भी है कि उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव का परिणाम कई पार्टीयों की राजनीति का भी परिणात होगा। वहीं, इन पांच राज्यों में से उत्तर प्रदेश के चुनाव माने जा रहे हैं। इस समय उत्तर प्रदेश की सत्ता समाजवादी पार्टी के हांथो में है लेकिन पार्टी में जो आज माहौल है वो कुछ ठीक नहीं है। उत्तर प्रदेश की राजनीति को बाप-बेटा और चाचा ने सिर पर उठा रखा है। सपा के कुनवे में राजनीति जोरों पर चल रही है। पार्टी की कुर्सी को लेकर आज भाई भाई का और बेटा बाप का नहंी रहा।   
आप को तो पता ही है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में धर्म संकट मचा हुआ है। वहीं कुनवे में धर्म संकट देख सपा पार्टी को राजनीति में लाने वाले पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह हातास और निराश हैं। उन्हें बखूबी पता है कि अगर पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं हुआ तो फिर से सत्ता में आना बहुत कठिन कार्य हो जाएगा। अगर दूसरी नजरों से दखें तो समाजवादी पार्टी टूटने की पूरी कगार पर खड़ी है और यह कहना सायद गलत नहीं होगा कि समाजवादी पार्टी के दो गुट होना निश्चित है।  सपा पार्टी में जो चल रहा  है उये देख के तो यही लगता है कि उत्तर प्रदेश के सीएम अखलेश यादव सपा को छोड अलग पार्टी बना सकते हैं और एक तरफ कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि अखिलेश यादव कांग्रेस से भी गठबंधन कर सकते हैं?अब देखना यह होगा कि क्या सपा टूटेगी, क्या अखिलेश कांग्रेस से हाथ मिलाएंगे क्या फिर से यूपी में अखिलेश राज दुबारा आएगा क्या पूर्व सीएम और बसपा सुप्रीमो माया वती फिर से यूपी की सीएम बनेगी क्या 27 साल बात कांग्रेस उत्तर प्रदेश में आएगी क्या भाजपा अपनी मोहर लगाएगी क्या होगा आगे? कौन हसता है कौन रोता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा? अब यह  तो तय है कि इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव पर बहुत सी पार्टीयों का भविष्य टिका हुआ है। आने बाले समय में देखते हैं कि कोन होगा पांच राज्यों का राजा? अभी तो और दिलचस्प होगा पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव।

-अवनीश सिंह भदौरिया

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