गुरुवार, 12 जनवरी 2017

सबको चित करेगा नेताजी धोबीपाट दांव!

जिसका जलवा कायम है। उसका नाम मुलायम है। जिसने कभी न झुकना सीखा उसका नाम मुलायम है। चट्टानों से लड़ना सीखा उसका नाम मुलायम है। ये नारे लगाते समाजवादी अक्सर विभिन्न कार्यक्रमों में देख जाते रहे हैं। तमाम विवादों के बावजूद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी अपने साथ उनके पिता मुलायम सिंह यादव का नाम जोड़ने के निर्देश अपने समर्थकों को दिए हैं। अगले महीने चुनाव हैं। बसपा, भाजपा, रालोद, कांग्रेस पार्टियां चुनावी समर में उतर चुके हैं और समाजवादी पार्टी में वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। लड़ाई भले ही अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच की हो पर दांव रामगोपाल यादव व अमर सिंह चल रहे हैं। भुनाया जा रहा है अखिलेश यादव की छवि और नेताजी के अनुभव को। अखिलेश यादव के दिमाग में पूरी तरह से बैठ गया है कि अमर सिंह उनके पिता मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव को उकसा कर उन्हें नीचा दिखाना चाह रहे हैं तो नेताजी इस सबका जिम्मेदार रामगोपाल यादव को मान रहे हैं। अमर सिंह ने अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटवाकर शिवपाल यादव को बनवाया तो रामगोपाल यादव ने आपातकालीन अधिवेशन बुलाकर प्रस्ताव पारित कराकर नेताजी की जगह राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को बनवा कर अमर सिंह को पार्टी से बाहर करा दिया। साथ ही शिवपाल यादव की जगह नरेश उत्तम को प्रदेश अध्यक्ष बनवा दिया। कई दिनों तक झेलने के बाद नेताजी अपने स्टाइल में आए और लखनऊ में अपने और शिवपाल यादव के कार्यालयपर ताला जड़ दिया। किसकी हिम्मत कि नेताजी को रोक दे। रामगोपाल यादव कार्यकर्ताओं, विधायकों और सांसदों के बल पर साइकिल पाने के लिए जोर लगा रहे हैं तो अमर सिंह अधिवेशन को अवैध साबित कर नेताजी को राष्ट्रीय अध्यक्ष मनवाने में। अमर सिंह का कहना है कि रामगोपाल यादव को अधिवेशन बुलाने का अधिकार नहीं था क्योंकि उन्हें छह साल के लिए निष्कासित किया जा चुका था। जहां तक बहाल करने की बात तो वह मौखिक था।
इस लड़ाई को राजनीतिक पंडित और आम लोग भले ही दो खेमे के रूप में देख रहे हों, नेताजी को अलग-थलग मानकर चल रहे हों पर मुझे अब भी नेताजी अपने काम में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। नेताजी अब रामगोपाल यादव का गलत साबित कर पार्टी को अपनी दिखाने में लग गए हैं। उनका प्रयास है कि अखिलेश यादव के चेहरे पर ही पार्टी चुनाव लड़े। रामगोपाल यादव को साइड लाइन कर अखिलेश यादव के चेहरे पर ही चुनाव लड़ा जाए। यही वजह है कि उन्होंने उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी को पत्र लिखकर रामगोपाल यादव को राज्यसभा के सपा नेता पद से हटाने का आग्रह किया है। यह सब करने से पहले उन्होंने बड़े वकीलों से सलाह-मशवरा भी किया है। दूसरी ओर रामगोपाल यादव इस प्रयास में हैं कि किसी भी तरह से अब नेताजी को राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनने देना है। वह भली भांति जनाते हैं कि नेताजी अब किसी भी हालत में उन्हें पचाने वाले नहीं हैं। यदि हालात पर चर्चा करें तो भले ही पार्टी के अधिकतर नेता और कार्यकर्ता रामगोपाल यादव और अखिलेश यादव के साथ खड़े हों पर अखिलेश यादव और नेताजी के रिश्ते और परिवार की बात करें तो अब भी नेताजी ही सब पर भारी हैं। पार्टी का कौन सा ऐसा कार्यालय है जहां पर नेताजी का कोई विरोध करते। यह सब होने के बावजूद नेताजी के पूरे परिवार में किसी भी सदस्य की हिम्मत उनके सामने बोलने की नहीं है।
अखिलेश यादव अमर सिंह को पार्टी से बाहर कराने और शिवपाल यादव को प्रदेश की राजनीति छोड़ने के लिए अड़े हैं। इसके लिए अमर सिंह और शिवपाल यादव दोनों तैयार हैं। नेताजी के कहने पर दोनों ही अपने को अलग कर सकते हैं। वैसे भी आजम खां का भी प्रयास है कि नेताजी ही राष्ट्रीय अध्यक्ष बने रहे। यही सुलह उन्होंने अधिवेशन बुलाने से पहले कराई थी। इसी सुलह पर नेताजी भी अधिवेशन में जाने को तैयार हो गए थे। यही वजह थी कि आजम कां अधिवेशन में नहीं गए। अब तक के घटनाक्रम पर नजर डाली जाए तो रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल के अलावा पार्टी के लगभग सभी नेताओं का प्रयास रहा है कि पिता-पुत्र एक हों। नरेश अग्रवाल और रामगोपाल यादव भी नेताजी को अखिलेश से जोड़कर कह रहे हैं पर मार्गदर्शक के रूप में।
रामगोपाल यादव भली भांति जानते हैं कि इस लड़ाई में पहले भी एक पार्टी से बाहर हो चुके हैं। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि वह मीडिया से मुखातिब होते हुए रोने लगे तो पार्टी में उनकी वापसी हुई। वह जानते हैं कि नेताजी, शिवपाल यादव, अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव, तेजप्रताप यादव सब नेताजी के परिवार के ही हैं और नेताजी के सामने बोलने की हिम्मत किसी में नहीं है। वह जानते हैं कि जब पूरा परिवार एक साथ बैठेगा तो मामले को सुलझा लिया जाएगा। इस तरह के प्रयास परिवार में चल भी रहे हैं। धमेंद्र यादव के पिता अभय राम यादव ने डांट पिलाकर उन्हें नेताजी से मिलने को कहा और वह मिले। पूरा परिवार जानता है कि नेताजी ने जमीन उठाकर परिवार को देश के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार का तमगा दिलाया है। ऐसे में परिवार के रिश्तेदार और घर के बुजुर्ग मिलकर नेताजी और अखिलेश यादव को मिलाने में कामयाब हो सकते हैं। यह समीकरण अमर सिंह भलीभांति समझ रहे हैं। यही वजह है कि प्रेस कांफ्रेंस में वह नेताजी के बगल में न बैठकर पीछे खड़े हुए। वह जानते हैं कि नेताजी से उनके संबंध मधुर रहे हैं और इन्ही संबंधों के आधार पर वह अपने काम करवाते रहे हैं आगे भी करवाते रहेंगे। वैसे भी वह राज्य सरकार के साथ ही केंद्र सरकार में भी वह अपनी गोटी फिट रखते हैं। रामगोपाल यादव यह भी समझ रहे हैं गत दिनों जब उनका पार्टी से निष्कासन हो गया था तो राज्यसभा नेता के लिए अखिलेश यादव नरेश अग्रवाल की पैरवी करने लगे थे। वह भी जानते हैं कि अखिलेश यादव परिवार के दबाव के सामने ज्यादा दिन नहीं टिक पाएंगे।
उधर मुलायम सिंह यादव को अंदेशा है कि कहीं आने वाले समय में रामगोपाल यादव पार्टी को न कब्जा लें। वह किसी भी तरह से अखिलेश यादव को बिना किसी खतरे के समाजवादी पार्टी में काबिज करना चाहते हैं। नेताजी का खेल हर खेल से ऊपर होता है। यह राजनीतिक दिग्गज भली भांति जानते हैं। जिस शख्स ने डॉ. राम मनोहर लोहिया, चौधरी चरण सिंह, वी.पी. सिंह, चंद्रशेखर से लड़-झगड़ कर अपने को देश के राजनीतिक पटल स्थापित किया जिस शख्स ने तमाम विरोध के बावजूद एक आम परिवार को देश का सबसे खास परिवार बना दिया। जिस शख्स ने जिस बेटे को देश के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री बनवाया हो वह शख्स अपने चचेरे भाई को चंद्रशेखर से बगावत कर राज्यसभा सांसद बनवाया हो। वह शख्स उस बेटे और उस भाई से क्या इतनी जल्दी हार मान लेगा, इस पर सोचने की जरूरत है। नेताजी जैसा राजनीति का मंझा हुआ सूरमा पार्टी को दो खेमों में बांटकर चुनाव लड़ेगा। यह मुश्किल ही लग रहा है।  राजनीति के माहिर खिलाड़ी आजम खां यह भलीभांति समझ रहे हैं। वह नेताजी की क्षमता जानते हंै वह जानते हैं विपरीत परिस्थितियों में मामले को संभालने के लिए ही नेताजी जाने जाते हैं। जिस बेटे को उन्होंने मुख्यमंत्री बनवाया उसे मुख्यमंत्री बनने से रोकने के लिए वह खड़े हो जाएंगे। यही हो ही नहीं सकता। यही वजह है कि इन परिस्थितियों में भी नेताजी और आजम खां के रिश्तों में कोई अंतर नहीं आया है।  आजम कां ने प्रख्यात पत्रकार वेद प्रताप वैदिक को बुलाकर पिता और पुत्र की बात फोन पर कराई।

-चरण सिंह राजपूत

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