नोटबंदी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक बता रहे हैं। आम आदमी लाइन में खड़ा है और काला धन रखने वाले पूंजीपति बड़ी-बड़ी गाड़ियों में मौज-मस्ती करते घूम रहे हैं। आम आदमी अपने खून-पसीने की कमाई का भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है और पूंजीपतियों ने निजी बैंकों में बड़े स्तर पर काला धन का सफेद कर लिया है। यह मैं ही नहीं बता रहा हूं। खुद मोदी के समर्थक बाबा रामदेव ने भी इस पर जोर दिया है। काले धन को खत्म करने गजब तरीका है मोदी जी का। एक ओर गरीबों का पैसा बैंकों में जमा करा रहे हैं और दूसरी और बैंकों से कर्जा लेकर अय्याशी करने वाले पूंजीपतियों का कर्जा माफ कर रहे हैं। वह भी हजारों करोड़ का। 10-20 हजार रुपए कर्जा लेने वाले किसान और मजदूर को यदि समय पर न चूका पाएं तो उन्हें जेल में ठूंस दिया जाता है और एसबीआई से लिया गया 63 कंपनियों का 7000 करोड़ रुपए का कर्जा माफ करने की तैयारी है। इन पूंजीपतियों में भगोड़ा विजया माल्या भी है। वाह री मोदी सरकार इन देश के गद्दारों को फिर से कर्जा देने के लिए सरकार गरीबों की जरुरत का पैसा भी बैंकों में जमा करा ले रही है। आपने सरकार बनने पर लोगों के खाते में 15-15 लाख रुपए डालने की बात की थी। आपके अनुसार ही अब तो सरकार के पास लगभग एक लाख करोड़ का काला धन आ गया है तो फिर गरीबों की भावनाओं से खिलवाड़ क्यों?
दिलचल्प बात यह है कि एस.बी.आई. माल्या को लोन चूकाने की स्थिति नहीं मान रही है। इस कर्जा माफी योजना में किंगफिशर एयरलाइंस का 1201 करोड़, के.एस. ऑयल का 596 करोड़, सूर्या फार्मास्यूटिकल का 526 करोड़, जी.ई.टी. पावर का 400 करोड़ और साई इंफो सिस्टम 376 करोड़ रुपए है। बैंक मोदी का बचाव करते हुए इसे कॉमर्शियल निर्णय बता रहा है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या एसबीआई केंद्र सरकार के अधीन नहीं आता है क्या ? इतना पूंजीपतियों को दिया एक लाख 14 हजार करोड़ रुपए का कर्जा बैंक न तो ले पा रहे हैं और न ही इन्हें डिफाल्टर घोषित कर पा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद इन पूंजीपतियों के नाम उजागर नहीं किये जा रहे हैं। मोदी जी ऐसे कैसे खत्म होगा काला धन ? काला धन खत्म करने के चक्कर में आप गरीबों को ही खत्म करने में लग गए हो।
प्रधानमंत्री गरीब जनता की भावनाओं से कैसे खेल रहे हैं। यह समझने की जरूरत है। सरकार के पास नोट छापने के लिए कागज नहीं और उन्होंने नोटबंदी की घोषणा कर दी। आनन-फानन में मैसूर में केंद्र सरकार की पेपर मिल में प्रयोग के तौर पर करंसी कागज बनाया गया था और उसी से काम चलाया जा रहा है पर वहां पर कुल जरूरत की 5 फीसद पेपर बनाने की ही क्षमता है। कहना गलत न होगा कि इस गैर जिम्मेदार सरकार ने देश को बड़ी परेशानी में डाल दिया है। हालात कितने ख़राब हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश में जरूरत का 10 फीसद कागज ही उपलब्ध बताया जा रहा है। बाकी की 90 फीसद कागज के लिए देश अमरीका, इंग्लैंड और जर्मनी की कंपनियों पर निर्भर हैं, जिनका टेंडर अभी भरा जाना है। भले ही सरकार जल्द ही नोटों की व्यवस्था करने की बात कर रही हो पर समस्या बड़ी विकट है। अभी तो टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। आरबीआई ने वित्त मंत्रालय को 22 हजार मीट्रिक टन कागज की जरूरत की रिपोर्ट भेजी है जो विदेशी कंपनियों से आना है।
सरकार ने बौखलाहट में बंगाल के शालबनी की प्रेस मुद्रणालय में दो हजार के नोट छापने की व्यवस्था की थी। जिससे काम चलाया गया। देवास और नासिक की प्रिंटिंग प्रेसों में पुराने नोटों का स्क्रैप हटाने की बड़ी चुनौती है। दरअसल दो महीने पहले यहां पर पांच सौ और हजार रुपए के नोट छापे गए थे। एक और कागज की व्यवस्था और दूसरी ओर स्याही की। छपाई की स्याही की आपूर्ति स्विटजरलैंड की कंपनी एसआईसीपीए कंपनी करती है, सूचना यह बता रही है कि इसकी व्यवस्था अभी की जानी है।
प्रधानमंत्री अपने को बड़ा देशभक्त और ईमानदार बताते घूम रहे हैं और मोदी के आदित्य बिड़ला ग्रुप से पच्चीस करोड़ रुपये घूस के तौर पर हवाला ट्रांजैक्शन लेने के दस्तावेज़ बाजार में आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि इनकम टैक्स विभाग ने 2013 की एक रेड में आदित्य बिड़ला ग्रुप का एक लैपटॉप ज़ब्त किया गया था । ये दस्तावेज़ उसी से मिले थे। हाल ही में दिल्ली विधानसभा की बहस में रिकार्ड में आया है कि दस्तावेजों में सहारा ग्रुप का मामला भी है। इनकम टैक्स के दस्तावेज़ों में पता चला है कि मोदी के मुख्यमंत्री रहते सहारा ग्रुप ने ढाई सौ करोड़ रुपये बतौर रिश्वत दिए थे। जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ को लिखित में दिया है कि इनकम टैक्स और सीबीआई के छापों के दौरान जो दस्तावेज़ सामने आये हैं उनसे पता चलता है कि देश के दो बड़े पूंजीपतियों ने कई मुख्यमंत्रियों और सांसदों को घूस दी है। सहारा ग्रुप में 22 नवंबर 2014 को तथा आदित्य बिरला ग्रुप पर 15 अक्टूबर 2013 को जो छापा पड़ा था, उससे संबंधित भी दस्तावेज़ हैं। सुनने में आ रहा है कि प्रशांत भूषण इस मामले को लेकर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट जायेंगे।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में इस रिपोर्ट को खुले तौर से रखा। उनके पास भी वे सब दस्तावेज़ मौजूद हैं, जिसमें नरेंद्र मोदी को घूस दिए जाने की बात पता चल रही है। मोदी जी यह क्या है ? यदि इसमें कोई सच्चाई नहीं है तो फिर आप चुप क्यों हैं ? केजरीवाल यदि इतना हो-हल्ला मचा रहे है तो कुछ उनके पास ऐसा कुछ है जिसके बल पर बड़ा आंदोलन छेड़ने की बात कर रहे हैं। यही वजह है कि दिल्ली की विधान सभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आयकर विभाग के उन मौलिक दस्तावेज़ों को रखा है जिनमें सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उद्योगपतियों से घूस लेकर उनके काम करने के लिये आरोपी बताया गया है। आरोप है कि बिड़ला ग्रुप के सुवेन्दु अमिताभ ने नरेन्द्र मोदी को 25 करोड़ रुपए की घूस दी थी।
दिलचल्प बात यह है कि एस.बी.आई. माल्या को लोन चूकाने की स्थिति नहीं मान रही है। इस कर्जा माफी योजना में किंगफिशर एयरलाइंस का 1201 करोड़, के.एस. ऑयल का 596 करोड़, सूर्या फार्मास्यूटिकल का 526 करोड़, जी.ई.टी. पावर का 400 करोड़ और साई इंफो सिस्टम 376 करोड़ रुपए है। बैंक मोदी का बचाव करते हुए इसे कॉमर्शियल निर्णय बता रहा है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या एसबीआई केंद्र सरकार के अधीन नहीं आता है क्या ? इतना पूंजीपतियों को दिया एक लाख 14 हजार करोड़ रुपए का कर्जा बैंक न तो ले पा रहे हैं और न ही इन्हें डिफाल्टर घोषित कर पा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बावजूद इन पूंजीपतियों के नाम उजागर नहीं किये जा रहे हैं। मोदी जी ऐसे कैसे खत्म होगा काला धन ? काला धन खत्म करने के चक्कर में आप गरीबों को ही खत्म करने में लग गए हो।
प्रधानमंत्री गरीब जनता की भावनाओं से कैसे खेल रहे हैं। यह समझने की जरूरत है। सरकार के पास नोट छापने के लिए कागज नहीं और उन्होंने नोटबंदी की घोषणा कर दी। आनन-फानन में मैसूर में केंद्र सरकार की पेपर मिल में प्रयोग के तौर पर करंसी कागज बनाया गया था और उसी से काम चलाया जा रहा है पर वहां पर कुल जरूरत की 5 फीसद पेपर बनाने की ही क्षमता है। कहना गलत न होगा कि इस गैर जिम्मेदार सरकार ने देश को बड़ी परेशानी में डाल दिया है। हालात कितने ख़राब हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि देश में जरूरत का 10 फीसद कागज ही उपलब्ध बताया जा रहा है। बाकी की 90 फीसद कागज के लिए देश अमरीका, इंग्लैंड और जर्मनी की कंपनियों पर निर्भर हैं, जिनका टेंडर अभी भरा जाना है। भले ही सरकार जल्द ही नोटों की व्यवस्था करने की बात कर रही हो पर समस्या बड़ी विकट है। अभी तो टेंडर प्रक्रिया में शामिल कंपनियों को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। आरबीआई ने वित्त मंत्रालय को 22 हजार मीट्रिक टन कागज की जरूरत की रिपोर्ट भेजी है जो विदेशी कंपनियों से आना है।
सरकार ने बौखलाहट में बंगाल के शालबनी की प्रेस मुद्रणालय में दो हजार के नोट छापने की व्यवस्था की थी। जिससे काम चलाया गया। देवास और नासिक की प्रिंटिंग प्रेसों में पुराने नोटों का स्क्रैप हटाने की बड़ी चुनौती है। दरअसल दो महीने पहले यहां पर पांच सौ और हजार रुपए के नोट छापे गए थे। एक और कागज की व्यवस्था और दूसरी ओर स्याही की। छपाई की स्याही की आपूर्ति स्विटजरलैंड की कंपनी एसआईसीपीए कंपनी करती है, सूचना यह बता रही है कि इसकी व्यवस्था अभी की जानी है।
प्रधानमंत्री अपने को बड़ा देशभक्त और ईमानदार बताते घूम रहे हैं और मोदी के आदित्य बिड़ला ग्रुप से पच्चीस करोड़ रुपये घूस के तौर पर हवाला ट्रांजैक्शन लेने के दस्तावेज़ बाजार में आ चुके हैं। बताया जा रहा है कि इनकम टैक्स विभाग ने 2013 की एक रेड में आदित्य बिड़ला ग्रुप का एक लैपटॉप ज़ब्त किया गया था । ये दस्तावेज़ उसी से मिले थे। हाल ही में दिल्ली विधानसभा की बहस में रिकार्ड में आया है कि दस्तावेजों में सहारा ग्रुप का मामला भी है। इनकम टैक्स के दस्तावेज़ों में पता चला है कि मोदी के मुख्यमंत्री रहते सहारा ग्रुप ने ढाई सौ करोड़ रुपये बतौर रिश्वत दिए थे। जाने माने वकील प्रशांत भूषण ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज़ को लिखित में दिया है कि इनकम टैक्स और सीबीआई के छापों के दौरान जो दस्तावेज़ सामने आये हैं उनसे पता चलता है कि देश के दो बड़े पूंजीपतियों ने कई मुख्यमंत्रियों और सांसदों को घूस दी है। सहारा ग्रुप में 22 नवंबर 2014 को तथा आदित्य बिरला ग्रुप पर 15 अक्टूबर 2013 को जो छापा पड़ा था, उससे संबंधित भी दस्तावेज़ हैं। सुनने में आ रहा है कि प्रशांत भूषण इस मामले को लेकर जल्द ही सुप्रीम कोर्ट जायेंगे।
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा में इस रिपोर्ट को खुले तौर से रखा। उनके पास भी वे सब दस्तावेज़ मौजूद हैं, जिसमें नरेंद्र मोदी को घूस दिए जाने की बात पता चल रही है। मोदी जी यह क्या है ? यदि इसमें कोई सच्चाई नहीं है तो फिर आप चुप क्यों हैं ? केजरीवाल यदि इतना हो-हल्ला मचा रहे है तो कुछ उनके पास ऐसा कुछ है जिसके बल पर बड़ा आंदोलन छेड़ने की बात कर रहे हैं। यही वजह है कि दिल्ली की विधान सभा में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आयकर विभाग के उन मौलिक दस्तावेज़ों को रखा है जिनमें सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उद्योगपतियों से घूस लेकर उनके काम करने के लिये आरोपी बताया गया है। आरोप है कि बिड़ला ग्रुप के सुवेन्दु अमिताभ ने नरेन्द्र मोदी को 25 करोड़ रुपए की घूस दी थी।

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